जनपद रुद्रप्रयाग के तल्लानागपुर क्षेत्र के फलासी की आराध्य माँ चण्डिका 25 सालों बाद अपने मन्दिर के गर्वगृह से 6 महीनों की दिवारा यात्रा पर बाहर निकल चुकी है। तुंगेश्वर मंदिर समिति द्वारा 6 माह की माँ चंडिका दिवारा यात्रा का आयोजन शुरू होने के बाद आजकल देवी माँ अपने गृह (घरया) दिवारा यात्रा कर रही है। इसके चलते देवी स्वरूप प्रतीक चिन्ह (ब्रह्मा ठंगुरु) फलासी गांव के प्रत्येक घर में दिवारा कर कुशल क्षेम पूछ रही है। बताते चलें कि आजकल देवी माता फलासी गांव में घर घर जाकर भक्तों को दर्शन दे रही हैं, देवी के घर घर पहुंचने पर ग्रामीण महिलाएं भावुक होती नजर आई। वहीं ग्रामीणों ने देवी के आगमन पर जय चंडिका मां के जयकारे लगाए। इसके बाद आगामी जनवरी माह में देवी उत्तर यात्रा (केदार यात्रा) को निकलेगी। चंडिका देवी की वैदिक पूजा अर्चना आचार्य जगदंबा प्रसाद बेंजवाल द्वारा आयोजित की जा रही है। तुंगेश्वर मन्दिर समिति के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह बर्त्वाल ने बताया कि पंचकोटी के गांवों द्वारा माँ चण्डिका की दिवारा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। जबकि मां चण्डिका द्वारा इन 6 महीनों में पूर्व,पश्चिम,उत्तर और दक्षिण चारों दिशाओं की यात्रा की जायेगी। सभी पंचकोटी के ग्रामीण आपसी समन्वय के साथ इस देव यात्रा को संपन्न कराने में जुटे हुए हैं। प्रबंधक कल्याण सिंह नेगी ने बताया कि 23 नवम्बर को देवी की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसके बाद विधिविधान के साथ देवी ने सभी भक्तों को दर्शन दिए। इसके बाद अग्रिम प्रक्रियाएं शुरू हुई। उपाध्यक्ष कैप्टेन दलबीर सिंह राणा ने बताया कि इस यात्रा में युवाओं का भरपूर साथ मिल रहा है। सभी ग्रामीण एकजुटता के साथ धार्मिक अनुष्ठान में जुट हुए हैं। सचिव पूरण सिंह खत्री ने बताया कि पंच कोटि के ब्राह्मणों द्वारा इस कार्य में विधिविधान से पौराणिक परंपराओं के आधार पूजा अर्चना की जा रही है,जिसके बाद देवी के ब्रह्म निशान को एरवालो द्वारा चलाया जाता है। जिन्हें छ माह तक देवी के साथ ही रहना पड़ता है।
