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November 6, 2026
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माई लॉर्ड, मुझे वैश्यालय चलाने दें… वकील साहब की बात सुन जज ने पूछा- कहां से ली वकालत की डिग्री?

मद्रास हाई कोर्ट ने एक वकील को जमकर फटकार लगाई है. तमिलनाडु के कन्याकुमारी से एक वकील ने वैश्यालय चलाने के लिए कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. उस याचिका में वकील ने वैश्यालय चलाने के लिए सुरक्षा की मांग की. याचिका दाखिल करने वाले शख्स ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा समय में वो खुद भी वकालत कर रहा है तो कोर्ट भी हैरान रह गई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वकील साहब आपने वकालत की डिग्री कहां से ली है?

दरअसल, एक वकील के खिलाफ वैश्यालय चलाने के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में खुद के खिलाफ हुई एफआईआर को खारिज करने की अपील की थी. मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया है और उसपर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बी पुगलेंधी की पीठ ने कहा कि यौन अधिकारों के आधार पर खुद के काम और उनका बचाव करना सही नहीं है.

क्या है पूरा मामला?

राजा मुरूगन नाम का शख्स एक ट्रस्ट चलाता है, जिसमें 18 साल से ज्यादा उम्र के युवाओं को उनकी सहमति से यौन संबंध बनाने के लिए सुविधाएं देता है. मुरूगन ने कोर्ट को बताया कि वो यौन संबंध से जुड़े सलाह और डॉक्टरों से चिकित्सकीय सुविधाएं भी मुहैया कराता है. मुरूगन ने कोर्ट में उसके खिलाफ हुई एफआईआर से खुद की सुरक्षा की मांग की. कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने बुद्धदेव मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या को गलत समझा है. उन्हें उसकी सही व्याख्या समझने की जरूरत है.

मुरूगन के डिग्री की हो जांच

कोर्ट ने कहा कि मुरूगन के डिग्री की जांच की जानी चाहिए. उसने जो भी कानूनी शिक्षा ली है, क्या वो किसी प्रतिष्ठित कॉलेज से है? कोर्ट ने कहा कि समाज में इस तरह के वकीलों की संख्या का बढ़ना, बेहद चौंकाने वाला है. इसलिए यह जांच का विषय है.

बार काउंसिल को भी चेताया

इस मामले में कोर्ट तब हैरान रह गई जब उसे पता चला कि याचिकाकर्ता एक प्रैक्टिसिंग वकील के तौर पर काम कर रहा है. इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बार काउंसिल को भी चेताया. कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल को इस बात पर गौर करना होगा कि समाज में प्रतिष्ठित वकीलों की ही संख्या में इजाफा हो. ऐसा तभी संभव हो सकेगा, जब बार काउंसिल ऐसे वकीलों के नामांकन को स्वीकार करेगी, जिन्होंने प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की होगी. कोर्ट ने कहा कि किसी भी गैर-प्रतिष्ठित संस्थान से वकालत की डिग्री लेने वाले लोगों पर रोक लगाई जाए.

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