कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने उत्तराखंड सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग के बाद अब आवास और एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) में भी बड़ा खेल सामने आया है।सुझाता पॉल के मुताबिक, साल 2021 से 2026 के बीच डेपुटेशन के जरिए सीधे स्थायी नौकरी देने का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि यूजेबीएनएल का एक मैकेनिकल इंजीनियर दिसंबर 2021 में एमडीडीए में डेपुटेशन पर लाया गया, लेकिन उसे इलेक्ट्रिकल असिस्टेंट इंजीनियर का काम दिया गया, जबकि उस पद पर पहले से अधिकारी मौजूद था।दिसंबर 2023 में डेपुटेशन खत्म होने के बावजूद बिना वैध एक्सटेंशन के वह पद पर बना रहा। बाद में नवंबर 2024 में एक साल का एक्सटेंशन दिया गया। इसके बाद 23 जुलाई 2025 को “असिस्टेंट इंजीनियर इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल” के नाम से नई पोस्ट ही बना दी गई।इस दौरान उस समय के सचिव डॉ. मीनाक्षी सुंदरम थे, जो वर्तमान में ऊर्जा विभाग के सचिव हैं और इस मामले में कोर्ट की टिप्पणी भी सामने आ चुकी है।सुझाता पॉल ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को डेपुटेशन समाप्त होने के बावजूद अधिकारी को मूल विभाग में वापस नहीं भेजा गया और वेतन जारी रहा। नई बनाई गई पोस्ट की वैधता 28 फरवरी 2026 तक बताई गई।सबसे बड़ा खुलासा 23 मार्च 2026 के आदेश में हुआ, जिसमें उक्त अधिकारी निशांत कुकरेती को आवासन विभाग में स्थायी रूप से समायोजित (Absorb) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्हें सीनियरिटी, सर्विस बेनिफिट और दो साल की प्रोबेशन का भी प्रावधान दिया गया।हैरानी की बात यह है कि यह पूरा मामला हाईकोर्ट में लंबित है और आदेश में भी लिखा गया है कि यह निर्णय कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा, इसके बावजूद कार्रवाई कर दी गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या उत्तराखंड में अब पद व्यक्ति विशेष के अनुसार बनाए जाएंगे? क्या डेपुटेशन के नाम पर स्थायी नियुक्ति का खेल चल रहा है?पार्टी ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए कहा कि यह प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि “सेटिंग सिस्टम” है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
