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August 27, 2026
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दिल्ली/NCR

सीएम अरविंद केजरीवाल ने फिर खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा, CBI की गिरफ्तारी को दी चुनौती

दिल्ली की आबकारी नीति में कथित घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को CBI गिरफ्तार करल चुकी है. अब इस मामले को लेकर सीएम केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने सीबीआई की ओर से गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी है. दिल्ली सीएम अभी न्यायिक हिरासत में हैं.

आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख की शनिवार को तीन दिन की हिरासत खत्म हो गई. इसके बाद दिल्ली की अदालत ने उन्हें 12 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. कोर्ट ने कहा था कि उनका नाम आबकारी नीति मामले में “मुख्य साजिशकर्ताओं” में से एक के रूप में सामने आया है. एजेंसी ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल ने जांच में सहयोग नहीं किया और टालमटोल वाले जवाब दिए. एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं.

कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री को 26 जून को अवकाशकालीन जज अमिताभ रावत ने तीन दिन के लिए सीबीआई हिरासत में भेज दिया था. उन्होंने कहा था कि इस समय गिरफ्तारी को अवैध नहीं कहा जा सकता. हालांकि, जज ने कहा था कि गिरफ्तारी अवैध नहीं है, लेकिन सीबीआई को अति उत्साही नहीं होना चाहिए. बाद में, 29 जून को अवकाशकालीन जज सुनैना शर्मा ने केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, क्योंकि सीबीआई ने इस समय उनकी आगे की रिमांड की मांग नहीं की थी. पिछले सप्ताह, जांच एजेंसी ने तिहाड़ जेल में मुख्यमंत्री से पूछताछ की थी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था. मई में, उन्हें आम चुनावों के मद्देनजर 01 जून तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दी गई थी. उन्होंने 2 जून को तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था. उन्होंने सरेंडर करने से पहले अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह अंतरिम जमानत बढ़ाने की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

100 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप

अरविंद केजरीवाल और कुछ अन्य AAP नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने शराब नीति बनाने के बदले में व्यापारियों और नेताओं के एक समूह से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत ली. दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा शराब लाइसेंस देने में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश देने के तुरंत बाद शराब नीति को रद्द कर दिया गया था.

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