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March 2, 2026
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डॉ. आर. राजेश कुमार की सख्त निगरानी में संवरेगा प्रदेश का अतिथि तंत्र, कुंभ 2027 से पहले गेस्ट हाउस बनेंगे आधुनिक और आदर्श
द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर जी के कपाट 21 मई को खुलेंगे, साथ हीं तृतीय केदार श्री तुंगनाथ जी के कपाट 2 मई को खुलेंगे

Category : धर्म

इस साल सावन में 4 नहीं 5 सोमवार पड़ेंगे, जानें जुलाई में कब से होगी इस माह की शुरुआत

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हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि इस पूरे महीने भगवान शिव की पूजा-उपासना की जाती है. सावन ही भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. इस पूरे माह के दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक करने से लेकर कावड़ यात्रा निकाली जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास के दौरान भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और हर तरह के दुखों से छुटकारा मिल जाता है. भोलेनाथ की असीम कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे श्रेष्ठ माना गया है. कब से […]...

योगिनी एकादशी पर पूजा के समय सुनें ये कथा, हर कार्य में मिलेगी तरक्की!

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हिन्दू धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस साल 2024 में योगिनी एकादशी का व्रत 2 जुलाई को रखा जाएगा. मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्रत रखने वाले लोगों को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. इसके साथ ही वह इस लोक के सुख भोगते हुए स्वर्ग की प्राप्ति करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त होता है. इस दिन व्रती लोगों को भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत […]...

कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू, किन नियमों का करना होता है पालन?

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हिन्दू धर्म में सावन माह शुरू होने के साथ ही कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाती है. सावन के साथ ही कांवड़ यात्रा को लेकर शिव भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिलता है. हर साल लाखों की संख्या में कांवड़ियां हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिवालयों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. शास्त्रों में कांवड़ यात्रा को लेकर कई महत्वपूर्ण नियमों का जिक्र किया गया है, जिनका यात्रा के दौरान पालन करना बहुत ही आवश्यक होता है. कांवड़ यात्रा के नियमों को लेकर किसी भी तरह की ढील नहीं दी गई है और अगर इनको […]...

काशी का वह प्राचीन मंदिर, जहां दर्शन करने से मिलता है केदारनाथ धाम से 7 गुना ज्यादा फल!

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भगवान भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में शिवजी का एक ऐसा मंदिर है जिसके बारे में यह मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ धाम से 7 गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है. यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. केदारेश्वर महादेव मंदिर की खासियत वाराणसी को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. यहां भोलेनाथ विभिन्न रूपों में विराजमान हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण मंदिर विशेश्वर धाम बाबा का काशी विश्वनाथ मंदिर है. यहां त्रिलोचन महादेव, तिलभंडेश्वर महादेव और केदारनाथ धाम से अधिक पुण्य प्रदान करने वाला केदारेश्वर महादेव मंदिर भी […]...

सोमवार को इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक, हर दुख और गरीबी होगी दूर!

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हिंदू धर्म में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव कहलाने वाले भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उनके निमित्त सोमवार का व्रत रखा जाता है. धार्मिक मत है कि इस व्रत के पुण्य से भगवान शिव व मां पार्वती परिणय सूत्र में बंधे थे. सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है. विवाहित महिलाएं सुख-सौभाग्य में वृद्धि और पति की लंबी उम्र के लिए सोमवार के दिन व्रत करती हैं. वहीं, कुंवारी कन्याएं शीघ्र विवाह और मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं. ऐसे में अगर आप […]...

कलयुग में बुरी बलाओं से कैसे बचाता है किन्नरों का आशीर्वाद? दुआओं में होती है ताकत!

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हिंदू धर्म में कलयुग में किन्नरों का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. जिन्हें लोग ट्रांसजेंडर भी कहते हैं. सड़कों, चौराहों और ट्रेन आदि में दिखाई दे जाने वाले इन किन्नरों के बारे में मान्यता है कि इनके श्राप और दुआओं दोनों में बड़ी शक्ति होती है. हिंदू मान्यता है कि यदि कोई किन्नर किसी व्यक्ति को दिल से दुआ या फिर कहें आशीर्वाद दे तो उसके जीवन से बड़ी से बड़ी समस्या पलक झपकते दूर और मनोकामनाएं शीघ्र ही पूरी हो जाती हैं. कलयुग में बुरी बलाओं से किन्नरों का आशीर्वाद कैसे बचाता है… हिंदू धर्म में पौराणिक कथाओं […]...

मां सती का वह शक्तिपीठ, जहां मूर्ति के बिना होती है पूजा

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भारत में माता सती के कुल 51 शक्तिपीठ हैं, इन सभी शक्तिपीठों की अपनी एक खासियत और मान्यताएं हैं. इन शक्तिपीठों में माता के अलग- अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. देवी मां का ऐसा ही एक मंदिर संगम नगरी प्रयागराज में है. खास बात यह है कि इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है. अलोप शंकरी मंदिर पौराणिक मान्यता पौराणिक इस कथा के अनुसार, दुखी भगवान शिव देवी सती के मृत शरीर के साथ जब आसमान में भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने उनका दुख कम करने के लिए अपने चक्र को देवी सती के […]...

रहस्यों का खजाना है जगन्नाथ पूरी का ‘रत्न भंडार’… अंदर कितना है सोना-चांदी?

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श्री जगन्नाथ मंदिर, जिसे श्रीमंदिर के नाम से भी जाना जाता है, उड़ीसा के पुरी में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. इस मंदिर की सबसे बहुमूल्य संपत्ति है ‘श्री रत्न भंडार’. मंदिर के नियमों और प्रथाओं के अनुसार, श्री जगन्नाथ महाप्रभु को अर्पित की गई सभी सोने, रत्नों आदि को रत्न भंडार में संग्रहीत किया जाता है. यह खजाना जगन्नाथ मंदिर को विश्वभर के भक्तों द्वारा किए गए योगदान और दानों से समृद्ध हुआ है. रत्न भंडार मंदिर के जगमोहन के उत्तर की ओर स्थित है. रत्न भंडार जगन्नाथ मंदिर का खजाना कक्ष है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और […]...

वट पूर्णिमा पर पूजा के समय सुनें ये व्रत कथा, जीवन में हर संकट से मिलेगी मुक्ति!

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हिन्दू धर्म में वट पूर्णिमा का व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है. इस व्रत को केवल महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का कामना करती हैं. पश्चिम भारत में यह व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है. और उत्तरी भारत में ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस विशेष दिन पर वट वृक्ष के साथ-साथ बेल के पेड़ की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास […]...

पशुपतिनाथ के बगैर क्यों अधूरे हैं केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन, क्या है कनेक्शन?

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हिन्दू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में हैं जिसमें केदारनाथ धाम भी शामिल है. केदारनाथ को भगवान शिव का 11वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यहां दर्शन करने से भक्तों की मन की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है. ऐसी मान्यता है कि केदारनाथ धाम के कण-कण में शिव की मौजूदगी की अनुभूति होती है. यहां महादेव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं. केदारनाथ धाम में भगवान और भक्तों का मिलन होता है. हर साल बड़ी संख्या में भक्त जोखिम उठाकर भोलेनाथ के दर्शन के लिए केदारनाथ पहुंचते हैं. देश के 5 पीठों में शिव का केदारनाथ धाम सर्वश्रेष्ठ माना […]...