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March 1, 2026
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इजराइल की स्ट्राइक से नहीं होंगे हूती के हमले कम, आम यमनियों का हुआ नुकसान

तेल अवीव पर हूती के ड्रोन हमले के बाद इजराइल के फाइटर जेट्स ने 20 जुलाई को यमन के होदेदाह बंदरगाह पर बमबारी कर उसको भारी नुकसान पहुंचाया. पिछले 8 महीनों से चल रही जंग में ऐसा पहली बार था कि इजराइल ने सीधे तौर पर यमन के हूतियों को निशाना बनाने के लिए हमले किए हो. इस हमले में करीब 6 लोगों की मौत हुई है और 80 लोग घायल हुए हैं. इस हमले के बाद इजराइल ने कहा कि उसने हूती के सैन्य ऑपरेशन्स के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ठिकानों को निशाना बनाया है. जबकि इजराइली सैन्य प्रवक्ता डैनियल हगरी ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने दोहरे इस्तेमाल (नागरिक आपूर्ति और सैन्य) वाले लक्ष्य पर हमला किया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजराइल की स्ट्राइक ने यमन हूती की हमला करने की क्षमता को कम नहीं किया है, बल्कि होदेदाह बंदरगाह को निशाना बनाना यमन की अर्थव्यवस्था और नागरिकों को जरूरी समान की सप्लाई को प्रभावित करेगा. एक हूती सूत्र ने न्यूयॉर्क टाइम्स बताया कि हवाई हमलों में बंदरगाह होदेदाह में एक बिजली स्टेशन के साथ-साथ गैस और तेल डिपो को निशाना बनाया गया है. सूत्र ने हूती के किसी ठिकाने को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है.

यमन की अर्थव्यवस्था पर निशाना

हमले के बाद हूती लीडर सैय्यद अब्दुल-मलिक बदरुद्दीन अल-हूती ने कहा कि इजराइल ने यमन की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के इरादे से होदेदाह पोर्ट को निशाना बनाया है. यमन के लोगों को संबोधित करते हुए, सैय्यद अल-हूती ने इस बात पर जोर दिया कि ये हमला ‘टिट फॉर टेट’ नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था.

यमन में तैनात अमेरिका के पूर्व आर्मी डिपलोमेट एडम क्लेमेंट्स ने कहा कि इजराइल के इन हमलों ने हूती की जगह आम यमनी को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. कुछ जानकार मान रहे हैं कि इजराइल की स्ट्राइक हूती के हमलों को और बढ़ावा देगी.

उत्तरी यमन की लाइफ लाइन होदेदाह पोर्ट

होदेदाह पोर्ट उत्तर यमन में रहने वाले यमनी नागरिकों के खाद्य, तेल, गैस और अन्य वस्तुओं के आयात लिए जरूरी है. रिसर्च फर्म नवंती ग्रुप के एक वरिष्ठ विश्लेषक मोहम्मद अलबाशा के मुताबिक इजराइल ने जिन बुनियादी ढाचों को निशाना बनाया है उनको फिर से बनाने के लिए बहुत सारा धन और समय लगेगा. उन्होंने अनुमान लगाया कि पूरे उत्तरी यमन में ईंधन की भारी कमी के कारण अस्पताल और वाहन जैसी जरूरत पर भारी असर पड़ेगा.

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