उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों पर उपयोग होने वाली “एग्जामिनेशन सेंटर मैनेजमेंट किट” की तैयारी, प्रिंटिंग और सप्लाई को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है।इस टेंडर को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आदित्य मंगल ने प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।आदित्य मंगल का कहना है कि यह काम बेहद छोटा है, लेकिन इसके बावजूद केवल तीन कंपनियों ने ही टेंडर में भाग लिया, जो अपने आप में सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आशंका जताई कि जब छोटे काम में ही पारदर्शिता पर सवाल हैं, तो बड़े स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में “सीक्रेसी” और “कॉन्फिडेंशियल” के नाम पर लागत बढ़ाई जा रही है, जबकि सामान्य सामग्री—जैसे टेप, लिफाफे, बैग आदि—स्थानीय स्तर पर भी आसानी से खरीदी जा सकती है।आदित्य मंगल ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर आयोग के चेयरमैन से भी दो बार मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
