32.2 C
Dehradun, IN
June 30, 2026
Home | Uttarakhand Vidhansabha Local and National News in Hindi
उत्तराखण्डदुनियादेशमुख्य समाचारराज्य

“देहरादून नारी निकेतन में संदिग्ध मौत: सुजाता पॉल ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग”

देहरादून स्थित नारी निकेतन में एक संवासिनी की मृत्यु का मामला अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना को आत्महत्या बताया जा रहा है, जबकि परिस्थितियाँ कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित महिला का अपने परिवार, विशेषकर पति से नियमित संपर्क था और वह शीघ्र ही अपने घर लौटने वाली थी। ऐसे में अचानक इस प्रकार की घटना होना संदेह उत्पन्न करता है। यदि महिला किसी मानसिक तनाव से गुजर रही थी, तो नारी निकेतन प्रशासन द्वारा उसकी समुचित निगरानी और परामर्श की व्यवस्था क्यों नहीं की गई—यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।जन प्रहार के प्रतिनिधि मंडल ने जिला प्रोबेशन अधिकारी सुश्री मीना बिष्ट से मुलाकात की और इस बात पर आपत्ति की कि बिना जांच के इस हादसे को आत्महत्या बताया जा रहा है। वहीं विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर भी असमंजस की स्थिति सामने आई है। समाज कल्याण मंत्री श्री खजान दास के कार्यालय ने कि यह महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत आता है जबकि मंत्री श्रीमती रेखा आर्य के कार्यालय ने बताया कि वह शहर से बाहर है। जैन प्रहार के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलने का समय मांगा है ताकि निष्पक्ष जांच के लिए वह अपना ज्ञापन उन्हें सौंप सके। श्रीमती रेखा आर्य के कार्यालय ने जल्दी ही समय देने का आश्वासन दिया है क्योंकि मंत्री जी मौजूदा समय में शहर से बाहर बताई जा रही हैं। जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि महिला सुरक्षा एवं संरक्षण तंत्र की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती हैं। भाजपा के शासनकाल में नारी निकेतन में भी युवतियां सुरक्षित नहीं है। यदि उक्त महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थी तो उसका इलाज किस डॉक्टर के द्वारा किया जा रहा था और उसकी देखरेख में कहां कमी रह गई?

यदि यह आत्महत्या है तब भी यह गंभीर स्थिति हो जाती है क्योंकि उसकी देखरेख के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाने चाहिए थे। जन प्रहार के सहसंयोजक एडवोकेट पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिस पर त्वरित और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। इस मामले को दबाए जाने की कोशिश करना अत्यंत गंभीर सवाल उत्पन्न कर रहा है जिस कारण इसकी निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई बाहर नही आ सकती।

अतः “जन प्रहार ” उत्तराखंड सरकार से मांग करता हैं कि:

1. इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

2. जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या मजिस्ट्रियल स्तर पर कराई जाए, ताकि सत्य सामने आ सके।

3. घटना के समय तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जाए।

4. यदि किसी प्रकार की लापरवाही, मानसिक उत्पीड़न या अन्य कारण सामने आते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

5. नारी निकेतन जैसी संस्थाओं में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।

हम विशेष रूप से उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण मंत्री श्रीमति रेखा आर्य एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मांग करते हैं कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।इस मौके पर “जन प्रहार” की संयोजक सुजाता पॉल, सह संयोजक एडवोकेट पंकज सिंह क्षेत्री और प्रवक्ता श्री रविन्द्र गुसाईं मौजूद रहे।

Related posts

बारिश और बर्फबारी नहीं होने से नैनीताल की झीलों पर संकट, 4 फीट तक गिरा जलस्तर

Nidhi Jain

जिन 13 सांसदों की NDA और INDIA दोनों से दूरी, उनका राजनीतिक झुकाव किस तरफ?

Uttarakhand Vidhansabha

जनता से जुड़ाव की मिसाल: रुद्रप्रयाग में आपदा प्रभावितों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री धामी

Uttarakhand Vidhansabha

Leave a Comment