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October 12, 2026
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सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे का फोकस- हर गर्भवती महिला तक समय पर पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं

उत्तराखंड सरकार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के उद्देश्य से व्यापक रणनीति के तहत लगातार समीक्षा और सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे द्वारा बीते एक सप्ताह से राज्य के सभी जनपदों की गहन समीक्षा की जा रही है ताकि जमीनी स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

जमीनी स्तर की समीक्षा से तैयार हो रही रणनीति

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में पहली बार फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एएनएम को भी जोड़ा गया। बैठक में विशेष रूप से हरिद्वार और पौड़ी जनपद की एएनएम ने सहभागिता कर जमीनी अनुभव साझा किए और ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों की जानकारी दी।बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इसके लिए संस्थागत प्रसव को मजबूत बनाना, गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एएनसी सेवाएं उपलब्ध कराना तथा प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शून्य होम डिलीवरी का लक्ष्य

समीक्षा बैठक में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और PCPNDT अधिनियम के क्रियान्वयन की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में शून्य होम डिलीवरी और शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों को मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में घरों पर प्रसव की घटनाएं अधिक हैं, वहां जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और उप जिलाधिकारी स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

गर्भवती महिलाओं की सटीक ट्रैकिंग पर जोर

बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की सटीक लाइन लिस्टिंग और EDD आधारित ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही समयबद्ध कॉलिंग और फॉलो-अप के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी महिला स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रह जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं के साथ विभागीय वाहनों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क और समयबद्ध पिकअप एवं ड्रॉप सुविधा को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए।

ANC जांच और आवश्यक परीक्षण अनिवार्य

समीक्षा के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं का शीघ्र पंजीकरण सुनिश्चित करने और कम से कम चार एएनसी जांच कराने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही आवश्यक लैब परीक्षण और अल्ट्रासाउंड अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए गए।सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की 100 प्रतिशत HBsAg जांच सुनिश्चित की जाए तथा पॉजिटिव मामलों में HBIG की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

एनीमिया नियंत्रण के लिए विशेष अभियान

बैठक में एनीमिया नियंत्रण को भी मातृ स्वास्थ्य सुधार का महत्वपूर्ण घटक बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग, समयबद्ध फॉलो-अप और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाए।मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि गंभीर एनीमिया के मामलों की विशेष निगरानी करते हुए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए, ताकि मातृ मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सके।

जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर बल

सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक IEC और IPC गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक माह प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं के साथ संवाद स्थापित करने और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया।

टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत राज्य के सभी हाई-रिस्क 4216 ग्रामों को अनिवार्य रूप से कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग की जाए तथा प्रत्येक चिकित्सालय की कुल ओपीडी का कम से कम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर किया जाए।

PCPNDT अधिनियम के सख्त अनुपालन के निर्देश

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में न्यूनतम छह अनिवार्य बैठकें आयोजित की जाएं तथा प्रत्येक 90 दिनों में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि लिंग निर्धारण से संबंधित अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए डिकॉय ऑपरेशन चलाए जाएं और सूचना देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित तथा सम्मानित किया जाए।

वार रूम से हो रही रियल टाइम मॉनिटरिंग

राज्य स्तर पर स्थापित मातृ स्वास्थ्य वार रूम के माध्यम से प्रत्येक गर्भवती महिला विशेषकर उच्च जोखिम मामलों की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से केस आधारित ट्रैकिंग, त्वरित निर्णय और समयबद्ध हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में प्रभावी प्रगति हो रही है।

समयबद्ध और परिणामोन्मुख कार्ययोजना पर जोर

बैठक के अंत में सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कोई भी गर्भवती महिला एएनसी सेवाओं, आवश्यक परीक्षणों और संस्थागत प्रसव से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक होम डिलीवरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी और सभी जनपदों को समयबद्ध तथा परिणामोन्मुख कार्ययोजना बनाकर तत्काल प्रभाव से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, समय पर जांच और उच्च जोखिम मामलों की पहचान कर विशेषज्ञ निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसके प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित डॉ. नितिन अरोड़ा (सीनियर कंसल्टेंट) भी उपस्थित रहे।

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