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March 6, 2026
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सरकार बनते ही पेट्रोलियम मंत्री कह गए ये बड़ी बात, क्या सच में जीएसटी के दायरे में आएंगे पेट्रोल-डीजल?

देश में लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ‘मोदी 3.0’ का गठन हो चुका है. साथ ही 72 मंत्रियों के बीच मंत्रालयों का बंटवारा भी हो चुका है. हरदीप सिंह पुरी को एक बार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है और पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है.

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि इस बार केंद्र सरकार की कोशिश होगी कि पेट्रोल-डीजल और प्राकृतिक गैस जैसी वस्तुओं को माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए. इससे आम लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी.

पहले भी हो चुकी हैं कोशिश

पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने की ये कोशिश नई नहीं है. जीएसटी व्यवस्था प्रभाव में आने और उसके बाद जीएसटी परिषद के गठन के बाद से ही इसकी कोशिशें की जा रही हैं. जीएसटी परिषद की लगभग हर बैठक में इस बात को सामने रखा गया है. लेकिन इस पर राज्यों के बीच सहमति अब तक नहीं बन पाई है.

राज्य सरकार के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वैट आय का एक बड़ा साधन है. ऐसे में राज्य सरकारें नहीं चाहती कि पेट्रोल-डीजल के जीएसटी के तहत जाने से उन्हें अपने राजस्व में नुकसान का सामना करना पड़े. राज्यों को इसके अलावा शराब पर टैक्स से भी मुख्य आय होती है.

हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने से ग्राहकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. वहीं पूरे देश में लोगों को इसकी अलग-अलग कीमत नहीं देनी होगी.

20% इथेनॉल मिक्स का लक्ष्य

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात के साथ ही पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार ने 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिक्स का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसके अगले साल यानी 2025 तक ही पूरा होने की उम्मीद है. इसी के साथ उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोलियम सेक्टर की पीएसयू में हिस्सेदारी बेचने के पक्ष में नहीं है.

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