Category : धर्म
भगवान शिव किसकी तपस्या में रहते हैं लीन, कौन हैं महादेव के आराध्य?
भगवान शिव हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय देवताओं में से एक माने जाते हैं. ये सभी देवों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं, इसलिए ही भगवान शिव को देवाधिदेव महादेव भी कहा जाता है. भोलेनाथ अनादि, अनंत, और स्वयंभू हैं. भगवान शिव जब सभी देवताओं में श्रेष्ठ हैं तो मन में जिज्ञासा उठती है कि उनके माता पिता कौन हैं? क्योंकि भगवान शिव के माता पिता को लेकर ज्यादातर भक्तजन अंजान हैं. श्रीमद् देवी भागवत पुराण में भगवान शिव के जन्म से जुड़ी कथा का जिक्र किया गया है. कुछ और धार्मिक ग्रंथों में भी भगवान शिव के जन्म […]...
भोले नाथ क्यों धारण करते हैं त्रिशूल और डमरू? मुट्ठी में समाया है संसार
भगवान शिव की जो अवधारणा हमारे दिमाग में है, उसमें वह हमेशा त्रिशूल धारण करते हैं और डमरू बजाते हैं. यह अवधारणा शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित विभिन्न प्रसंगों से बनी है. इन पुराणों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू का विशेष महत्व बताया गया है. शिवपुराण के एक प्रसंग में त्रिशूल को कफ, वात और पित कहा गया है. कहा गया है कि त्रिशूल पर नियंत्रण हासिल करने के बाद व्यक्ति को संसार की चिंता नहीं रहती. ऐसे व्यक्ति का मन विचलित नहीं होता और वह सहज समाधि का प्राप्त कर सकता है. शिवपुराण के ही […]...
सावन में शिवजी के इन 7 मंत्रों का करें जाप, हर काम में मिलेगी सफलता!
भगवान शिव को देवों का देव महादेव कहा जाता है. भोलेनाथ की कृपा अगर किसी व्यक्ति को प्राप्त हो जाए, तो उसे जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. सावन का महीना शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सबसे सर्वोत्तम माना गया है. ऐसे में अगर आप भगवान शिव के प्रिय मास सावन में शिव मंत्रों का जाप करते हैं तो आपको विशेष लाभ प्राप्त हो सकते हैं. इन मंत्रों के जाप से मानसिक और शारीरिक सुकून मिलता है और सभी मनोकामनाएं भी भोलेनाथ पूरा कर देते हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के इन मंत्रों के बारे […]...
कैसे प्रकट हुआ पहला शिवलिंग? सबसे पहले किसने की थी पूजा
हिंदू धर्म में बहुत से देवी देवता हैं लेकिन इन सब में सिर्फ भगवान शिव ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनको साकार रूप के साथ साथ, शिवलिंग के रूप में निराकार रूप में भी पूजा जाता है. भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए उनके निराकार स्वरूप शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है. शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई और पहली बार किसने शिवलिंग की पूजा अर्चना की थी, इसके बारे में शिव पुराण में बताया गया है. शिवलिंग के उत्पत्ति की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु […]...
कैसे हुई सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना, जानें इसके पीछे की रोचक कथा और महत्व
हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग विशेष महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, ये सब ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की अनंत ऊर्जा का स्वरूप माने जाते हैं. इन 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सबसे पहले नंबर पर आता है. यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित है. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का बहुत खास महत्व माना जाता है. इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव के द्वारा किया गया है. सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव का पूजन विशेष विधि-विधान से किया जाता है. सोमनाथ का अर्थ है ‘सोम के स्वामी’, जो चंद्रमा […]...
9 महीने नहीं, फिर कितने दिन माता कौशल्या के गर्भ में रहे थे भगवान राम?
भगवान राम चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अवतार लिए. यह कहानी तो सबको पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम माता कौशल्या के गर्भ में कितने दिन रहे. यदि नहीं, तो आज हम इसी प्रसंग की चर्चा करने वाले हैं. गोस्वामी तुलसी दास ने श्रीराम चरित मानस में इस प्रसंग का वर्णन विस्तार से किया है. इसके अलावा महर्षि भारद्वाज और याज्ञवल्क्य मुनि के संवाद में भी इस प्रसंग का जिक्र मिलता है. इसमें कहा गया है कि भगवान राम माता कौशल्या के गर्भ में 12 महीने तक रहे थे. श्रीरामचरित मानस में […]...
आषाढ़ पूर्णिमा पर करें ये आसान उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद, चमकेगा भाग्य
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा मनाई जाती है. मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में सबसे खास होती है. इस बार 20 जुलाई 2024, दिन शनिवार को आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 21 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा का स्नान दान आदि कार्य होंगे. इस दिन दान पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है. इस दौरान, लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके लिए तर्पण और दान करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन स्नान-दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य प्राप्त होता […]...
पूजा में सिर पर रूमाल या तौलिया रखना चाहिए या नहीं? क्या कहते हैं शास्त्र
अक्सर देखा जा रहा है कि लोग पूजा में बैठते समय रूमाल या तौलिया सिर पर रख लेते हैं. इस बात को लेकर अक्सर पूछा जाता है कि क्या ऐसा करना उचित है? जबकि शास्त्रों में सिर ढकने का निषेध है. हमारे धर्म शास्त्र केवल शौच के समय ही सिर ढकने की सलाह देते हैं. वहीं किसी को प्रणाम करते समय, जप-पूजा ओर हवन करते समय सिर खुला रखने का विधान करते हैं. सनातन धर्म के तमाम शाष्त्रों के मुताबिक पूजा हवन आदि में सिर खुले रहेंगे तो ही अभीष्ठ फल की प्राप्ति होगी. आज इस खबर में हम उन्हीं […]...
गुप्त नवरात्रि के नौवें दिन ऐसे करें मां मातंगी की पूजा, मिलेगा विद्या और कला का आशीर्वाद!
शास्त्रों में गुप्त नवरात्रि को बहुत ही शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है और इस दौरान सभी दस महाविद्या की पूजा अर्चना करने का विधान है. जिसके अनुसार, नौवें दिन मां मातंगी की पूजा की जाती है. यह तंत्र की देवी हैं, वचन की देवी हैं. यह एकमात्र ऐसी देवी हैं, जिनके लिए व्रत नहीं रखा जाता है. यह केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं. मां मातंगी का स्वरूप शास्त्रों के अनुसार मतंग भगवान शिव का ही एक नाम है. भगवान शिव की आदिशक्ति देवी मातंगी हैं. मां मातंगी का रंग श्याम है. वह अपने मस्तक […]...
मासिक दुर्गाष्टमी पर इन 4 संयोग में करें पूजा, धन-संपदा का मिलेगा आशीर्वाद!
हिन्दू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी व्रत का बहुत अधिक महत्व है. मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व सभी देवी भक्तों के लिए बहुत खास माना जाता है. यह पर्व हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़ी धूमधाम और भक्ति के साथ मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस पावन अवसर पर मां आदिशक्ति की आराधना करते हैं, उन्हें नवरात्र के बराबर फल की प्राप्ति होती है. इस बार मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durga Ashtami) 14 जुलाई को मनाई जाएगी. इस दिन बनने वाले शुभ योग में पूजा करने से उसका दोगुना फल प्राप्त होगा. इसके साथ ही घर […]...
