कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। कार्यक्रम से पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीरज तिवारी ने बताया कि पार्टी द्वारा पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध दर्ज कराने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता तय कार्यक्रम के तहत मौके पर पहुंचे और क्षेत्र की समस्याओं को उठाया। तिवारी का दावा है कि विरोध की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।उन्होंने क्षेत्र की तीन प्रमुख समस्याओं—स्वास्थ्य, चिकित्सा सेवाएं और प्राधिकरण से जुड़े मुद्दों—को गंभीर बताते हुए कहा कि इनका प्रभाव सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। वहीं, जिला पंचायत सदस्य ने भी क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इन मुद्दों को कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इधर, कांग्रेस नेता पीयूष बिष्ट ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि मुख्यमंत्री कालाढूंगी के गैबुआ क्षेत्र में आज एक निजी विद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। इसी के मद्देनजर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध की रणनीति बनाई थी। हालांकि, कार्यक्रम रद्द होने के बाद काले झंडे दिखाने का निर्णय वापस ले लिया गया और सांकेतिक रूप से मुख्यमंत्री पुतला दहन कर विरोध जताया गया।बिष्ट ने प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और सरकारी अस्पतालों की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है।कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और जहां-जहां समस्याएं सामने आएंगी, वहां पार्टी मुखर रूप से आवाज उठाएगी।
