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September 29, 2026
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सिसौना के खेतों में ‘जहर’! कर्ज लेकर बोई फसल बर्बाद, जहरीले पानी ने तोड़ी किसानों की उम्मीदें……

रुड़की के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था और मानवता, दोनों पर सवाल खड़े करती है। जहाँ एक ओर सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक इकाइयों का ‘केमिकल युक्त जहर’ किसानों की मेहनत को मिट्टी में मिला रहा है। सिसौना गांव के किसान आज अपनी बेबसी पर आंसू बहाने को मजबूर हैं। आखिर क्या है पूरा मामला देखिए इस रिपोर्ट में… ये तस्वीरें गवाह हैं उस सिस्टम की लापरवाही की, जो रात के अंधेरे में दम तोड़ देता है। रुड़की का भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र, जहाँ की कई नामी कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में केमिकल युक्त जहरीला पानी खुले नालों में बहा रही हैं। यह जहर सिसौना गांव के खेतों में पहुँच रहा है, जिससे लहलहाती फसलें पल भर में काली पड़ रही हैं।​इन किसानों की दास्तां सुनकर आपका दिल पसीज जाएगा। सिसौना के इन किसानों ने साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर खाद और बीज का इंतजाम किया था। मकसद सिर्फ इतना था कि फसल अच्छी होगी तो बच्चों का भविष्य संवर जाएगा और परिवार का पालन-पोषण हो सकेगा। लेकिन कंपनियों के इस ‘पाप’ ने किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।किसानो कहना है कि हम कर्ज लेकर खेती करते हैं रात में ये कंपनियां जहर छोड़ देती हैं। हमारी फसल बर्बाद हो गई है, अब हम बच्चों को क्या खिलाएंगे और कर्ज कैसे चुकाएंगे? कोई सुनने वाला नहीं है।मामले ने जब तूल पकड़ा और किसान तहसील कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने रटा-रटाया आश्वासन थमा दिया। हालांकि, मीडिया के कैमरों के सामने संबंधित विभागीय अधिकारी ने कार्यवाही का भरोसा तो दिया है, लेकिन सवाल वही है क्या ये जांच सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाएगी?प्लॉयुषण अधिकारी ने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में आया है। संबंधित कंपनियों को चिन्हित किया जा रहा है। नाले में केमिकल युक्त पानी छोड़ना नियमों के खिलाफ है, इस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी और सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसा न हो।कैमरा स्क्रीन पर दिख रही ये तस्वीरें चीख-चीख कर इंसाफ मांग रही हैं। सवाल बड़ा है क्या उन रसूखदार कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन होगा जिनका नाम इस प्रदूषण के पीछे सामने आ रहा है? या फिर हर बार की तरह आश्वासन की चादर तले इस मामले को भी दबा दिया जाएगा?

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