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March 7, 2026
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मणिपुर के CM एन बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले पर उग्रवादियों ने किया हमला, 1 जवान घायल

मणिपुर से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले पर उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया. इस हमले में 1 जवान घायल हो गया है. सीएम के सुरक्षा काफिले यह हमला उस समय किया गया है, जब यह काफिला हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले की तरफ जा रहा था. पूरा मामला ये है कि सीएम एन बीरेन सिंह मंगलवार को जिरीबाम का दौरा करने वाले थे.

उनके दौरे से पहले सीएम की सुरक्षा टीम वहां जा रही था. संदिग्ध उग्रवादियों ने घात लगाकर टीम पर हमला कर दिया. सुरक्षा बलों के वाहनों पर कई गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की. पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान एक जवान घायल हो गया. उग्रवादियों ने शनिवार को जिरीबाम में दो पुलिस चौकियों, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस और करीब 70 मकानों में आग लगा दी थी.

CM ने क्या कहा ?

काफिले पर हमले के बाद सीएम बीरेन सिंह कहा, यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण और अत्यंत निंदनीय है. यह सीधे मुख्यमंत्री पर, यानी सीधे राज्य की जनता पर हमला है. इसलिए राज्य सरकार को कुछ करना होगा. इसलिए मैं अपने सभी साथियों से बात करूंगा और हम कोई निर्णय लेंगे.”

मुख्यमंत्री वहां मौजूदा स्थिति का जायजा लेने जाने वाले थे इससे एक दिन पहले ये खबर सामने आ गई. मणिपुर करीब एक साल से छिटपुट हिंसा की चपेट में है. मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.

आए दिन यहां गोलीबारी और हत्या की खबरें सामने आती रहती हैं. पिछले साल 3 मई को जातीय हिंसा के बाद राज्य में 200 से अधिक लोग मारे गए थे और हजारों लोग बेघर हो गए थे. ये हिंसा तब भड़की थी जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के विरोध में राज्य के पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किया गया था.

मणिपुर में मई 2023 में भड़की थी हिंसा

मणिपुर में मई 2023 में हिंसा भड़की थी, तब से लगातार गोलीबारी-हिंसा जैसी घटनाएं घट रही हैं. मैतेई-कुकी विवाद को अब तक पूरी तरह सुलझाया नहीं गया है. मणिपुर में जातीय हिंसा को शांत कराने के लिए न जाने कितने जतन किए गए, इसके बावजूद इस पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाया है. मैतेई लोग मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं और मुख्य रूप से इंफाल के आसपास के घाटी क्षेत्रों में बसे हुए हैं, जबकि आदिवासी पहाड़ियों में ज्यादातर निवास करते हैं.

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