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October 15, 2026
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अंकिता भंडारी के परिजनों को मिला न्याय

दोषियों को मिली आजीवन कठोर कारावास की सजा

प्रदेश सरकार ने दिखाई प्रतिबद्धता, रसूखदारों को प्रभावित नहीं करने दी न्याय प्रक्रिया

लोगों को भड़काने वाले छुटभैये नेताओं की भी हुई बोलती बंद

उत्तराखंड में हुए बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। आज न्यायालय ने इस मामले में तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भगोली और अंकित गुप्ता को सख्त आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न केवल अंकिता के परिवार को एक बड़ी राहत दी है, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता में यह भरोसा भी मजबूत किया है कि कानून और सरकार न्याय दिलाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

प्रारंभिक कार्रवाई में ही दिखी सरकार की गंभीरता

इस जघन्य अपराध के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने तत्परता दिखाई। आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई या रसूख बर्दाश्त नहीं करेगी। साथ ही, एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित की गई, जिससे सबूत मजबूत हुए और चार्जशीट ठोस बनी।

न्याय की प्रक्रिया रही तेज, पारदर्शी और प्रभावी

अंकिता के परिजनों की मांग पर तीन बार वकील बदला गया, जिससे उन्हें पूरा विश्वास रहे कि उनकी बात पूरी तरह से न्यायालय में रखी जाए। करीब 100 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जो इस केस को मजबूत बनाने में निर्णायक साबित हुए। मामले को गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज कर कानूनी धाराओं को और सख्त किया गया, जिससे आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाने की राह प्रशस्त हुई।

रसूखदारों के खिलाफ कड़ा रुख

इस केस में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य एक रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखता था। लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी दबाव या राजनीतिक प्रभाव जांच या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके। यही वजह है कि आज जब दोषियों को सजा सुनाई गई, तो यह केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक न्याय की मिसाल बन गई।

सस्ती राजनीति करने वालों को जनता ने नकारा

इस संवेदनशील प्रकरण में जब सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही थी, तब कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे थे। कुछ छुटभैये नेता न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाकर और जनता को भड़काने की साजिश रचकर वे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहते थे। लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता ने न सिर्फ ऐसे लोगों की सच्चाई को पहचाना, बल्कि उन्हें सिरे से नकार दिया। सरकार के पारदर्शी और निष्पक्ष रवैये ने इनकी दाल गलने नहीं दी, और आज का फैसला इस बात का प्रमाण है कि राजनीति नहीं, केवल न्याय की जीत हुई है।

सरकार का संकल्प और जनता का भरोसा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला हमारी बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार आगे भी ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी।

अंकिता को मिला न्याय, यही नया उत्तराखंड है‏

अंकिता भंडारी को आज न्याय मिला है, यह न्याय केवल एक बेटी के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेटियों के लिए है। इस पूरे घटनाक्रम में उत्तराखंड सरकार की भूमिका न सिर्फ सक्रिय रही, बल्कि उदाहरण पेश करने वाली भी रही। तेज, पारदर्शी और सशक्त न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो गया है कि अब अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। यह उत्तराखंड की नई तस्वीर है, एक ऐसा प्रदेश जहां न्याय सर्वोपरि है और सरकार जनविश्वास की कसौटी पर खरी उतरती है।

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