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August 31, 2026
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उत्तराखंड की धरती का लाल पुष्कर सिंह धामी!

सत्ता की लगाम, दिशा निर्धारण और विकसित उत्तराखंड के बीज बोने का संकल्प, इन तीनों में निपुण हैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

जन सरोकार व संवेदना के साथ एक अभिभावक के रूप में पुष्कर धामी की जड़ें आज भी मिट्टी में गहरी

मिट्टी, खेत और मेड़ के बीच जननायक, किसानों के बीच खेतों में उतरा उत्तराखंड का नेतृत्व

उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा चेहरा जो जितना धरातल से जुड़ा है, उतना ही ऊंचे संकल्पों का ध्वजवाहक भी है वह है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। खटीमा के नगरा तराई में जब आज सुबह उन्होंने खेत की पगडंडी पर कदम रखा, हाथ में धान की नर्सरी ली और कीचड़ भरे खेत में रोपाई शुरू की, तो यह केवल एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं था। यह उस मिट्टी से उनके रिश्ते का सार्वजनिक स्मरण था, जिसने उन्हें गढ़ा है।

पुष्कर धामी खेत की मिट्टी, बैलों की लगाम, और हल की मूठ उनके लिए कोई फोटो-ऑप नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा रही है। उनके लिए यह कार्य केवल अन्न उगाने का नहीं, बल्कि श्रम, संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। जब वे खेत में धान रोप रहे थे, तो हर किसान और मातृशक्ति को अपना ही सपूत दिखा वही सपूत जिसने गांव से निकलकर राज्य की बागडोर संभाली, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भुलाया।

इस अवसर पर धामी ने ‘हुड़किया बौल’ की धुन पर स्थानीय देवताओं, भूमियां, इंद्र और मेघ की वंदना कर यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत उनके निर्णयों और दृष्टिकोण की नींव है। वे आधुनिकता को अपनाने वाले नेता हैं, लेकिन परंपरा को त्यागे बिना। उनकी राजनीति में तकनीक और संस्कृति, विकास और विरासत, आत्मनिर्भरता और आध्यात्म सभी के लिए समान स्थान है।

मुख्यमंत्री धामी यह भलीभांति जानते हैं कि खेत की मेड़ पर चलना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण है राज्य की नीति की दिशा तय करना। सत्ता की लगाम खींचते समय वे जिस कुशलता से फैसले लेते हैं धर्मांतरण विरोधी कानून से लेकर यूनिफॉर्म सिविल कोड तक वैसी ही कुशलता वे खेत में बैलों की लगाम संभालते समय भी दिखाते हैं।

आज जब देश के अधिकांश नेता शहरी गलियारों में कैद हो चुके हैं, पुष्कर सिंह धामी जैसे नेता उम्मीद की उस किरण की तरह हैं, जो यह भरोसा दिलाते हैं कि नेतृत्व अगर जमीनी हो, तो विकास की दिशा सही होती है। वे केवल मुख्यमंत्री नहीं वे उस “नायक” की परिभाषा हैं, जो मिट्टी से पैदा होता है, और उसी मिट्टी को गौरव देता है। क्योंकि जमीन से जुड़ा नेता ही, भविष्य की ऊंचाई तय कर सकता है।

 

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