भ्रष्टाचार का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है?
जिस होटल को नोटिस जारी कर सील किया गया,
आज वही होटल फिर से बनकर लगभग पूरा हो चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
सील खोलने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई?
जानकारी के मुताबिक,
नगर परिषद यानी एमसी ऑफिस जीरकपुर द्वारा
इस इमारत को पहले अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया गया था,
लेकिन उसके बावजूद निर्माण कार्य न सिर्फ दोबारा शुरू हुआ,
बल्कि सब कुछ एमसी ऑफिस के आला अधिकारियों के सामने होता रहा।
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की शिकायत भी की, लेकिन हर बार वही पुराना रटा-रटाया जवाब दिया गया—
“मामले की जांच की जा रही है।”
अब सवाल यह है कि—
जब इमारत बनती रही,
तो जांच किस बात की हो रही थी?
क्या एमसी ऑफिस जीरकपुर के अधिकारियों ने होटल का नक्शा पास कर दिया?
या फिर नियम-कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?
यह मामला अब एमसी ऑफिस जीरकपुर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर
गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि
प्रशासन इस पूरे मामले पर कब और क्या कार्रवाई करता है,
या फिर यह मामला भी
फाइलों में दबकर रह जाएगा।
