उत्तराखंड से इंसानियत और भाईचारे की ऐसी तस्वीर सामने आई है। जो मौजूदा दौर की धर्म और पहचान की बहसों के बीच सुकून देती है। ये कहानी है उस भारत की जहां रिश्ते नाम या मजहब से नहीं बल्कि दिल से बनते हैंकोटद्वार में दीपक ने बाबा नाम की दुकान के नाम को लेकर विवाद खड़ा हुआ। नाम बदलने के दबाव के बीच दुकानदार दीपक ने खुद को मोहम्मद दीपक बताकर बड़ा संदेश दिया। कि पहचान इंसानियत से होती है नाम से नहीं। उनके इस कदम ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। वहीं दूसरी ओर खानपुर क्षेत्र के ढंडेरा में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर निकली शोभायात्रा के दौरान अनोखा दृश्य देखने को मिला। जब शोभायात्रा मुस्लिम समाज के घरों के सामने से गुज़री तो राव इमरान और राव साजिद ने आगे बढ़कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने अपने हाथों से हलवा बनाकर प्रसाद स्वरूप वितरित किया। वहां न कोई भेदभाव था न कोई दूर सिर्फ अपनापन और सम्मान। राव इमरान और राव साजिद का कहना है कि जब तक लोगों के दिलों में इंसानियत जिंदा है तब तक हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कोई नहीं तोड़ सकता। कोटद्वार के मोहम्मद दीपक और ढंडेरा के राव इमरान-साजिद की ये पहल बताती है कि देश की असली ताकत नारों में नहीं बल्कि आम लोगों के व्यवहार में है।जो गंगा-जमुनी तहज़ीब को जिंदा रखे हुए हैं।
