उत्तराखंड में अवैध खनन पर लगाम लगाने के सरकारी दावों के बीच रुड़की से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। झबरेड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही ने न सिर्फ शिकायतकर्ता की पहचान उजागर कर दी, बल्कि खनन माफिया और पुलिस के बीच संभावित सांठगांठ पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि पूरा मामला रुड़की के झबरेड़ा थाना क्षेत्र के लाठरदेवा शेख गांव का है। गांव निवासी नदीम ने देर रात गांव में मिट्टी से भरे डंपरों के अवैध संचालन की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई थी। नियम के अनुसार शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए थी, लेकिन इकबालपुर चौकी पुलिस की कार्यप्रणाली ने शिकायतकर्ता को ही खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया।बताया जा रहा है कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की ओर से नदीम के पास फोन आया। हैरानी की बात यह रही कि फोन करने वाले पुलिसकर्मी ने नदीम को ही खनन कारोबारी समझ लिया। बातचीत के दौरान सिपाही ने कहा कि “अभी गाड़ी रोक दो, एक से डेढ़ घंटे बाद चलाना।” इतना ही नहीं, कॉल में यह भी सुनाई दे रहा है कि “हमारी आपसे दस-दस की बात हो रखी है।”इस बातचीत से यह आशंका गहरा गई कि अवैध खनन के मामलों में पुलिस और खनन कारोबारियों के बीच किसी तरह की सेटिंग चल रही थी।मामला यहीं नहीं रुका। अगले दिन सुबह पुलिस ने फिर नदीम को फोन कर अन्य खनन कारोबारियों के नाम पूछे। जब नदीम ने अनीस गौड़ का नाम लिया, तो सिपाही ने कहा कि “उसका फोन तो मेरे पास आ ही रहा था।” इसके साथ ही नदीम को खनन माफिया नौशाद का नाम लेकर चौकी इंचार्ज से मिलने के लिए भी कहा गया
शिकायतकर्ता का आरोप:
नदीम का कहना है कि उसने अवैध खनन रोकने के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने उसका नाम और नंबर सार्वजनिक कर दिया। अब उसे डर है कि खनन माफिया उससे बदला ले सकते हैं और उसकी जान को खतरा हो सकता है।
नदीम ने बताया कि उसने पूरी कॉल रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर संभालकर रखी है और अब वह इस मामले में उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग करेगा।
बड़ा सवाल:
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सूचना देने वालों की पहचान ही सुरक्षित नहीं रहेगी, तो क्या भविष्य में कोई आम नागरिक अवैध गतिविधियों की शिकायत करने की हिम्मत जुटा पाएगा?
