शासकीय आवास पर देवभूमि की समृद्ध लोकपरंपरा के प्रतीक लोकपर्व फूलदेई के अवसर पर बच्चों का आगमन हुआ। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे इन नन्हे मेहमानों ने देहरी पर फूल और अक्षत सजाकर जब मधुर स्वर में “फूलदेई, फूलदेई, छम्मा देई…” गाया, तो वातावरण बसंत की खुशबू से परिपूर्ण हो उठा।

इन बच्चों की सरलता, उल्लास और आत्मीयता हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की जीवंत झलक है। सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ईश्वर से मंगलकामना करता हूं।


प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, बसंत के स्वागत और हमारी लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला फूलदेई पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों को इन अमूल्य परंपराओं से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।

