स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और तकनीक का प्रभावी समावेश आज की आवश्यकता है। आज हिमालयन हेल्थकेयर इनोवेशन समिट में प्रतिभाग करते हुए यह अनुभव हुआ कि यदि हम प्राथमिक एवं निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाएं और उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों से जोड़ें, तो दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और प्रभावी रूप से पहुंचाई जा सकती हैं।

कोविड-19 के अनुभव ने भी यह स्पष्ट किया है कि तकनीक आधारित स्वास्थ्य प्रणाली भविष्य की दिशा तय करेगी।

हमारे स्वास्थ्य कर्मी इस व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनका निरंतर प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन और नवीन तकनीकों से जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रॉमा केयर और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने, तथा महिला स्वास्थ्य विशेषकर एनीमिया उन्मूलन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सभी हितधारकों से आह्वान है कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक, नवाचारी और तकनीक आधारित समाधान विकसित करें, ताकि स्वस्थ और सशक्त राज्य का निर्माण किया जा सके।

