राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से आज जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने भेंट कर जनपद में राजस्व, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, भूमि विवादों के निस्तारण और होमस्टे संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी उन्होंने बताया कि भूमि म्यूटेशन (नामांतरण) प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भूमिधर की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम खतौनी में दर्ज करने के लिए अब लोगों को पटवारी चौकी के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, बल्कि पटवारी गांवों में जाकर चौपाल आयोजित कर मौके पर खतौनी का वाचन और आवश्यक संशोधन कर रहे हैं। इस अभियान के तहत करीब 25 हजार लाभार्थियों के नाम दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण में भी विशेष अभियान चलाकर लगभग 12 हजार मामलों का निस्तारण कर शून्य लंबित स्थिति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र न बनने से बीमा दावे, बैंक संबंधी कार्यों और संपत्ति उत्तराधिकार में कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, इसलिए इस व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि सीमांकन, मेड़ विवाद, पैमाइश, गूल पर अतिक्रमण तथा पारिवारिक भूमि बंटवारे (कुर्रे) जैसे राजस्व विवादों के समाधान के लिए जनपद में राजस्व प्रवर्तन समिति का गठन किया गया है। इस नवाचार के तहत अब तक करीब 3,400 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जिले में कई स्थानों पर होमस्टे को व्यावसायिक होटल की तरह संचालित किया जा रहा है, जो मानकों के विपरीत है। ऐसे मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 300 होमस्टे संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं तथा निरस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है।
