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February 4, 2026
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हरियाणा में 40 फीसदी वोट, 24 सीटें… अमित शाह का अहिरवाल बेल्ट से सत्ता की हैट्रिक का फॉर्मूला

हरियाणा के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले थे. 10 लोकसभा सीटों से घटकर 5 सीटों पर सिमट गई. विधानसभा चुनाव से पहले पहले बीजेपी को हार से उभारने का जिम्मा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संभाल लिया है और ताबड़तोड़ दौरे शुरू कर दिए. अमित शाह मंगलवार को हरियाणा के महेंद्रगढ़ में ओबीसी सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे हैं. तीन हफ्ते में उनका यह दूसरा दौरा है. 29 जून को पंचकूला पहुंचे थे और अब महेंद्रगढ़ से दक्षिणी हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र को साधने की कवायद करते नजर आएंगे.

लोकसभा चुनाव में बिगड़े सियासी समीकरण को बीजेपी दुरुस्त करने में जुट गई है और एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग के सहारे सत्ता की हैट्रिक लगाने की फिराक में है. बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सैनी को सीएम की कुर्सी सौंपी थी और प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मोहन लाल बडौली के हाथों में दी. इस तरह बीजेपी ने मजबूती से कास्ट केमिस्ट्री के साथ विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी की है.इसी कड़ी में अमित शाह 15 दिन पहले पंचकूला में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर उन्हें सियासी बूस्टर देने के बाद अब महेंद्रगढ़ में बीसी सम्मेलन में शिरकत करके अन्य पिछड़ा वर्ग को मजबूती से जोड़े रखने का दांव है.

हरियाणा के महेंद्रगढ़ में केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में बीसी सम्मेलन में अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए हैं. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली सहित केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और प्रदेशभर से पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए हैं. महेंद्रगढ़ से अमित शाह दक्षिणी हरियाणा के ओबीसी सम्मान समारोह कार्यक्रम में अहीरवाल को साधने का प्रयास रहेगा. खासकर महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात सहित अन्य जिलों की विधानसभा सीटों पर ओबीसी के बड़े वोट बैंक को साधने पर नजर है.

अहिरवाल बेल्ट पर पकड़ मजबूत बनाने की कवायद

दक्षिण हरियाणा का इलाका पिछले दस सालों में बीजेपी का मजबूत गढ़ के तौर पर बन चुका, जिसे अहीरवाल इलाका भी कहा जाता है. हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने बीजेपी से 10 में से पांच सीटें छीन लीं, लेकिन दक्षिण हरियाणा की भिवानी-महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम सीट पर बीजेपी ने कब्जा बरकरार रखा था. इसके अलावा करनाल और कुरुक्षेत्र सीटें भी बीजेपी जीतने में सफल रही है. यही वजह है कि अब विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी दक्षिणी हरियाणा पर अपना खास फोकस केंद्रित कर दिया है.

लोकसभा चुनाव से पहले स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 मई को गांव पाली में ही चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे थे और अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पाली में ओबीसी सम्मेलन के जरिए दक्षिण हरियाणा के अहिरवाल बेल्ट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कवायद है. दक्षिणी हरियाणा के मजबूत चेहरा और अहीरवाल के नेता केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह पार्टी में भितरघात का जिक्र कर चुके हैं, साथ ही उन्होंने हाल ही में लोकसभा चुनाव में जीत के बाद अपने धन्यवादी दौरों पर प्रदेश सरकार को भी चेताया था.

दक्षिणी हरियाणा में 24 विधानसभा सीटें

हरियाणा की सत्ता का रास्ता दक्षिणी हरियाणा से होकर गुजरता है. दक्षिणी हरियाणा में 24 विधानसभा सीटें आती हैं. अहिरवाल के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात सहित अन्य जिलों की 24 विधानसभा सीटों पर ओबीसी के बड़े वोट बैंक को साधने पर बीजेपी की नजर है. भिवानी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और झज्जर जिले की चार-चार, रेवाड़ी व मेवात की तीन-तीन और चरखी दादरी की दो विधानसभा सीटें पड़ती हैं. इन सभी विधानसभा सीटों को लेकर ही बीजेपी ने महेंद्रगढ़ में ओबीसी सम्मान समारोह रखा है, जिसे अमित शाह साधने की कवायद करेंगे.

ओबीसी सैनी जाति से आने वाले सीएम नायब सिंह सैनी को सत्ता की कमान संभालने के बाद से एक्टिव हैं. लोकसभा के नतीजे आने के साथ ही नायब सैनी विधानसभा की जंग को फतह करने के लिए ताबड़तोड़ बैटिंग शुरू कर दी है. सीएम ने हरियाणा में ओबीसी वर्ग में क्रीमी लेयर की सीमा छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख कर इस वर्ग को बड़ी राहत देने का काम किया था. पिछड़ा वर्ग के सम्मान के लिए हरियाणा में बीजेपी सरकार की ओर से लागू की गई योजनाओं को बीसी सम्मेलन के जरिए घर-घर पहुंचाने की रणनीति है.

40 फीसदी से ज्यादा ओबीसी वोटर

हरियाणा में करीब 40 फीसदी से ज्यादा ओबीसी वोटर हैं, जो किसी भी दल का सियासी खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. बीजेपी का पूरा फोकस गैर-जाट वोटों पर है. कांग्रेस और इनोलो ने हरियाणा की सत्ता में रहने के दौरान जाट समुदाय के इर्द-गिर्द अपनी सियासत को रखे थे, लेकिन बीजेपी ने गैर-जाटों के बीच नया वोट बैंक तैयार किया. बीजेपी ने अब पिछड़े समुदाय को साधने की कोशिश में जुट गई है.

बीजेपी ने पहले नायब सिंह सैनी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी और अब सत्ता की कुर्सी उनके हवाले कर दी है. हालांकि, जब उन्हें प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया तब इसे एक संतुलनकारी पहल के तौर पर देखा गया था, लेकिन अब लोकसभा के समीकरण बदल गए हैं. ओबीसी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण समाज से बनाया है. बीजेपी पूरी तरह से ओबीसी और ब्राह्मण केमिस्ट्री पर काम कर रही है और उसकी फॉर्मूले पर सत्ता की हैट्रिक लगाने में लगी है.

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