देहरादून जिले के चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत रामपुर मंडी इलाके में आसन बैराज झील के निकट बेशकीमती शीशम के पेड़ों के गायब होने का मामला सामने आया है। उपलब्ध तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कुछ पेड़ों की शाखाओं को बड़े पैमाने पर काटा गया है, जिसे लोपिंग कहा जाता है। एक तस्वीर में पेड़ की ऊंचाई करीब 12-13 फुट दिख रही है, जबकि कुछ दिनों बाद ली गई तस्वीर में वही पेड़ महज 5-6 फुट का रह गया है। आसन रेंजर आनंद रावत ने इस मामले में मौका-मुआयना किया और बताया कि ग्रामीणों ने जलावन के लिए कुछ छोटे सुखे पेड़ काटे हैं। और पेड़ काटने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। उनके अनुसार प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ नहीं काटे गए हैं । लेकिन तस्वीरों में दिख रहे पेड़ हरे-भरे और मजबूत नजर आ रहे हैं, जो बड़े होने की अवस्था में थे। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पिछले 4-5 वर्षों से इसी तरह की चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जा रही है—पहले लोपिंग कर पेड़ को कमजोर किया जाता है, फिर हिस्सों में काटकर हटाया जाता है।

शीशम की लकड़ी अपनी मजबूती और टिकाऊपन के कारण बाजार में काफी मांग वाली और महंगी है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर बनते हैं। सन बैराज उत्तराखंड की पहली रामसर साइट है, जहां सर्दियों में हजारों देशी-विदेशी प्रवासी पक्षी आते हैं। इस क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए यह इलाका बहुत संवेदनशील माना जाता है। चकराता वन प्रभाग से अपेक्षा है कि मामले की गहन जांच कराई जाए, जीपीएस लोकेशन पर साइट का दोबारा निरीक्षण हो और यदि आवश्यक हो तो सैटेलाइट इमेजरी से तुलना की जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। हम इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेंगे।
