9-10 साल में कर्मचारी हित में एक काम भी नहीं करा पाए मंत्री
अधिकारी- कर्मचारी न्याय पाने के लिए खा रहे दर-दर की ठोकरें
विभागीय ढांचा व सातवें वेतनमान आज तक नहीं करा पाए लागू
स्वास्थ्य विभाग से इनको पैदल करा चुका है मोर्चा
हर मोर्चे पर विफल हो चुके हैं मंत्री धन सिंह रावत
विकासनगर -जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं उत्तराखंड राज्य भंडारागार निगम कर्मचारी संगठन के संरक्षक रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत आज तक इन 9-10 वर्षों में (दोनों कार्यकाल में) कर्मचारी हितों के लिए एक (सिंगल) काम तक नहीं कर पाए, जोकि इनकी नाकामी को दर्शाता है और इस नाकामी के चलते सरकार को ऐसे नाकाम मंत्री को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए | नेगी ने कहा कि भंडारागार निगम के कार्मिकों को सातवें वेतनमान का लाभ प्रदान किए जाने के मामले में 4-5 साल से पत्रावली शासन में धूल फांक रही है तथा इसी प्रकार विभागीय ढांचे से संबंधित पत्रावली भी रद्दी का ढेर बन चुकी है, लेकिन विभागीय मंत्री धन सिंह रावत ने कभी इन पत्रावलियों की ओर देखने तक की जहमत तक नहीं उठाई !आलम यह है कि मंत्री सिर्फ और सिर्फ अपने निजी हित साधने में लगे हैं तथा इन कार्मिकों के हितों से इनका कोई लेना-देना नहीं है| नेगी ने कहा कि सातवें वेतनमान के मामले में कार्मिकों को मा. न्यायालय की शरण लेनी पड़ी तथा इसी प्रकार विभागीय ढांचे में परिवर्तन/ पद सृजन व अन्य मामले में भी कार्मिक मा. न्यायालय की शरण में जा रहे हैं, ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब हर काम मा. न्यायालय से ही होना है तो फिर विभागीय मंत्री की आवश्यकता क्या है !प्रश्न यह भी उठता है कि क्या मंत्री कभी अपने विभाग के कार्यों, कार्मिकों की पीड़ा, कार्यों में प्रगति व विभागीय हितों के बारे में मंथन करते हैं !कार्मिक अपने परिवार का गुर्जर बसर कैसे कर रहे हैं, मंत्री को इससे कोई लेना देना नही है | यही हाल शिक्षा विभाग में भी है | आखिर जो लाखों रुपया इनके ऐशो-आराम में खर्च हो रहा है, उसका क्या औचित्य है ! जब किसी को न्याय ही नहीं दिला पा रहे हैंं तो इनको बाहर का रास्ता दिखाना ही बेहतर होगा|मोर्चा मा.मुख्यमंत्री से मांग करता है कि ऐसे नाकाम मंत्री को बर्खास्त कर प्रदेश की जनता पर उपकार करने का काम करें | पत्रकार वार्ता में- ठा. भाग सिंह व पछवादूनअध्यक्ष अमित जैन मौजूद थे
