उत्तराखंड में जहां एक ओर सरकार हरियाली बचाने के दावे करती है, वहीं रुड़की के भगवानपुर में भू-माफियाओं ने प्रशासन के साथ मिलकर एक ‘बड़ा खेला’ कर दिया है।

तेलपुरा-बुगावाला मार्ग पर रातों-रात एक घना बाग गायब हो गया और अब वहां हरे-भरे पेड़ों की जगह ‘चार्ट पेपर’ वाली अवैध प्लॉटिंग की मंडी सज गई है।

ये तस्वीरें रुड़की के भगवानपुर क्षेत्र की हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां लगभग 140 बीघा में फैला एक फलदार बाग था, जिस पर प्रशासन की मिलीभगत से आरी चला दी गई। आज यहां की तस्वीर बदल चुकी है।

मौके पर जेसीबी चलाकर सड़क नुमा रास्ता बना दिया गया है। अभी भी कुछ पेड़ कटने बाकी हैं, लेकिन बिल्डरों के हौसले इतने बुलंद हैं

कि उन्होंने बिना किसी नक्शे के, सिर्फ चार्ट पेपर पर प्लॉटिंग का चित्र बनाकर जमीन बेचनी भी शुरू कर दी है। ग्रामीणों में इस कदर दहशत है कि वे बिल्डरों को ‘दबंग’ बता रहे हैं और कैमरे के सामने आने से कतरा रहे हैं।

मौखिक बातचीत में उन्होंने बताया कि इस खेल में बड़े अधिकारियों का हाथ है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अगर इसकी बारीकी से जांच हो, तो यहाँ भारी मात्रा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का भी खुलासा होगा।

वहीं मौके पर कई दुकाने बनाकर भी ख़डी कर दी गईं है लेकिन भाववानपुर उपजिलाधिकारी और hrda के स्थानीय सहायक अभियंता को शायद यह दुकानों का निर्माण नजर नहीं आ रहा है जो मिडिया से फोन पर बात करके यह सफाई दे रहे है

कि मौके पर कोई निर्माण नहीं चल रहा है और नाहीं कोई सड़क या रास्ता और खम्बे लगे है पर यह दुकानों के निर्माण भी ग्रामीणों के आरोपों को सबूत बना रही है। जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां तैनात एक गार्ड ने खुद कैमरे पर स्वीकार किया कि यहां प्लॉटिंग हो रही है और कई प्लॉट पहले ही बेचे जा चुके हैं। उसने बेखौफ होकर मालिक से बात करने की सलाह भी दे डाली, जो यह साबित करता है कि इन्हें किसी कानून का डर नहीं है।”

सवाल यह उठता है कि जब पेड़ कट रहे थे, तब स्थानीय प्रशासन और वन विभाग कहाँ था? जब अवैध निर्माण हो रहा है, तो HRDA खामोश क्यों है? हालांकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद HRDA सचिव मनीष सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।”देखना यह होगा कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या इन दबंग भू-माफियाओं पर वाकई कोई शिकंजा कसा जाएगा। क्या उजड़े हुए बाग की जगह फिर से हरियाली लौटेगी या यह इलाका कंक्रीट के अवैध जंगल में तब्दील हो जाएगा?
