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August 5, 2026
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गौरैया संरक्षण पहल: विकासनगर के युवा की अनोखी मुहिम

​आधुनिकता और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच, हमारे आंगन की पहचान रही नन्हीं गौरैया अब धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर है। लेकिन देहरादून जिले के विकासनगर में एक युवा इस दिशा में एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है। ग्राम एटनबाग निवासी आकाश मुल्तानी पिछले चार वर्षों से बेकार पड़े ‘कबाड़’ का इस्तेमाल कर गौरैया के लिए सुरक्षित आशियाने तैयार कर रहे हैं। पेश है विकासनगर से यह विशेष रिपोर्ट।”​विकासनगर के ग्राम एटनबाग निवासी आकाश मुल्तानी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यक्तिगत प्रयास के रूप में उभरी है। आकाश पिछले 4 वर्षों से निरंतर उन वस्तुओं का उपयोग कर रहे हैं जिन्हें आमतौर पर कचरा समझकर फेंक दिया जाता है। इंजन के पुराने एयर फिल्टर, पीवीसी पाइप और लकड़ी के बेकार टुकड़ों को जोड़कर वे ऐसे कृत्रिम घोंसले तैयार करते हैं, जो पक्षियों के रहने के अनुकूल हों। ​आकाश की इस कार्यप्रणाली की विशेषता ‘वेस्ट टू बेस्ट’ तकनीक है। उनके द्वारा निर्मित ये घोंसले न केवल किफायती हैं, बल्कि गौरैया को वैसा ही सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं जैसा उन्हें प्राकृतिक कोटरों में मिलता है। वे इन घोंसलों और दाना-पानी के पात्रों को स्थानीय लोगों को निशुल्क वितरित कर रहे हैं, ताकि समाज में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ सके। ​20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर आकाश की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके द्वारा लगाए गए कृत्रिम घोंसलों में अब गौरैया के जोड़े न केवल निवास कर रहे हैं, बल्कि वहां नई पीढ़ी का जन्म भी हो रहा है। पर्यावरण के प्रति इस प्रकार के व्यक्तिगत प्रयास जैव विविधता के संतुलन को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होते हैं।

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