विकास के दावों और हकीकत के बीच की खाई देखनी हो, तो रुड़की के लाठरदेवा शेख गाँव चलिए। जहाँ करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी आज सफेद हाथी साबित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहाँ विकास नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार का खेल’ खेला गया है। गुस्साए ग्रामीणों ने अब भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष और जल निगम के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।ये तस्वीरें हैं रुड़की के लाठरदेवा शेख गाँव की, जहाँ ग्रामीणों ने पानी की समस्या को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि भाजपा नेता अनीश गौड़ ने विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर पानी की टंकी के निर्माण में बड़ा घोटाला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्टाचार की वजह से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। ग्रामीणो का कहना है कि 8-9 साल हो गए टंकी बने हुए, लेकिन आज तक हमारे घरों में पानी की एक बूंद नहीं पहुँची। पाइपलाइन जगह-जगह से फटी पड़ी है। हम आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार टंकी के निर्माण में बेहद घटिया क्वालिटी के पाइपों का इस्तेमाल किया गया। आलम यह है कि जैसे ही टंकी चालू होती है, पाइपलाइन जगह-जगह से लीक होने लगती है। जब यह मामला मीडिया में उछला, तो आनन-फानन में जल निगम के अधिकारी गाँव पहुँचे। उन्होंने टंकी तो चालू की, लेकिन पानी घरों तक पहुँचा या नहीं, इसकी सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझा।मामले में नया मोड़ तब आया जब टंकी ऑपरेटर ने खुद विभाग की पोल खोल दी।टंकी ऑपरेटर ने बताया कि अधिकारियों ने मुझे सिर्फ एक-दो घंटे के लिए पानी खोलने को कहा है। पाइप इतने कमजोर हैं कि दबाव झेल नहीं पाते और गाँव तक पानी पहुँचने से पहले ही रास्ते में बह जाता है।अब इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि इस धांधली की उच्च स्तरीय जाँच हो और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए ताकि उन्हें उनका हक यानी ‘स्वच्छ जल’ मिल सके।अब सवाल यह उठता है कि ‘हर घर नल, हर घर जल’ का नारा देने वाली सरकार के राज में, क्या इस भ्रष्टाचार की जाँच होगी? या फिर लाठरदेवा शेख के ग्रामीण ऐसे ही दूषित पानी पीने और सिस्टम की मार झेलने को मजबूर रहेंगे?
