शासकीय आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। परिसर में इस वर्ष मात्र 45 दिनों की अवधि में 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया है।

इस दौरान अधिकारियों को स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स की स्थापना के लिए एक प्रभावी नीति तैयार करने एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता देते हुए विशेष सब्सिडी प्रदान करने सम्बन्धी निर्देश दिए।

साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व जैसे अवसरों पर “थ्री-बी” आधारित पौधारोपण अभियान चलाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। इस प्रकार की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होंगी बल्कि मौन पालन और शहद उत्पादन को भी स्थायी रूप से बढ़ावा देंगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

