श्री पंचमुखी मंदिर, धर्मपुर (देहरादून) में वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य केसरी नंदन, श्री राम जी के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की आराधना कर समस्त प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की।


बल, बुद्धि और विवेक के दाता श्री हनुमान जी केवल रक्षक ही नहीं, बल्कि मर्यादा और धर्म के प्रतीक भी हैं। जब अधर्म अपने चरम पर पहुंचता है, तब उनका पराक्रम संस्कृति और मर्यादा का उपहास उड़ाने वालों को यह संदेश देता है कि सत्य, संस्कार और धर्म के मार्ग से विचलन का अंत सदैव पतन की ओर ले जाता है।

जहाँ-जहाँ अहंकार, अन्याय और अधर्म दिखाई दिया, चाहे वह लंका में रावण का दंभ हो, कालनेमि का छल हो या मायावी शक्तियों का अभिमान, हनुमान जी ने उसे चूर-चूर कर दिया।

