जनपद रुद्रप्रयाग में 2013 की केदारनाथ आपदा के जख्म आज भी लोगों को झकझोर कर देती है।16-17 जूनब2013 को आई दैवीय आपदा के 13 साल बीत गए हैं, मगर उस समय की ख़ौफ़नाक दृश्य आज भी कुछ पल के लिए आखों में दर्द के आँसू ले आते हैं।बताते चलें कि 2013 की 16 ओर17 जून को हुई रिकॉर्ड बारिश ने केदारनाथ धाम से लेकर पूरे उत्तराखंड को देखते ही देखते एक ऐसा ख़ौफ़नाक जख्म दिया, जिसकी वो दर्द भरी यादें हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गई है।

2013 की केदारनाथ आपदा मुख्य रूप से 3 दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश (बादल फटने जैसी स्थिति) और ग्लेशियर के ऊपर मौजूद चोराबाड़ी झील के फटने (GLOF) के कारण आई थी। इस प्राकृतिक आपदा में मानवीय गतिविधियों जैसे अनियोजित निर्माण,अतिक्रमण और अंधाधुंध कटाई ने विनाश को कई गुना बढ़ा दिया था।

15 से 17 जून 2013 के बीच उत्तराखंड में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश हुई। केदारनाथ और ऊपरी क्षेत्रों में दो दिनों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे पहाड़ों पर पानी का भारी दबाव बन गया था। केदारनाथ मंदिर से लगभग दो किलोमीटर ऊपर स्थित चोराबाड़ी झील (गांधी सरोवर) भारी बारिश के कारण पूरी तरह भर गई थी। दबाव अधिक होने के कारण झील का किनारा टूट गया। और एक विशाल जलप्रलय और भारी मलबा अचानक पूरी ताकत के साथ मंदाकिनी नदी में आ गिरा।भूस्खलन (Landslides): लगातार बारिश के कारण घाटी के दोनों ओर की चट्टानें कमजोर होकर मंदाकिनी नदी में गिर गईं, जिससे नदी का बहाव कई जगहों पर रुक गया। जब पानी का दबाव बढ़ा, तो ये प्राकृतिक बांध टूट गए और पानी विकराल रूप लेकर नीचे बस्तियों में घुस गया। नदी के किनारों पर संवेदनशील इलाकों में बेतहाशा और अवैध निर्माण किए गए थे। वनों की कटाई और नदी के प्राकृतिक प्रवाह के रास्ते में निर्माण होने के कारण पानी को फैलने की जगह नहीं मिली, जिससे तबाही और जानमाल का नुकसान बहुत अधिक बढ़ गया था।

वहीँ आधिकारिक आंकड़ो के आधार पर 2013 की इस ख़ौफ़नाक तवाही के कारण लगभग 6 हजार लोगों की जानें चली गई थी, ओर हजारों लोग लापता हुए।यह जख्म हमेशा के लिए एक इतिहास बनकर रह गया।तो वहीँ 2014 के बाद फिर से विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम को सवारने, सजाने का कार्य तेजी से शुरू हुआ, केदारनाथ में फिर से भव्य, दिव्य पुनर्निर्माण होने से यहाँ देश विदेशों से हर वर्ष रिकॉर्ड लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री पहुँच रहे हैं। बेशक आधुनिक युग की माँग के साथ सबकुछ जरूरी है।

हालाँकि इंसान अपनी प्रगति, विकास के आगे 2013 की आपदा की ख़ौफ़नाक यादों को मात्र एक दिन के लिए ही याद करने लगें है। जबकि धन, दौलत, व्यापार, सुविधाओं ,लालच ने केदरनाथ क्षेत्र को पुनः सीमेंट, कंक्रीट, के अलावा यहाँ के प्राकृतिक पहाड़ी बुगियालों में टेंट,दुकानें लगाकर फिर से इस धरती को जख्मी करने की होड़ लगा दी है, जोकि आने वाले काल चक्र को न्याता देने को विवश दिखता है।केदारनाथ त्रासदी के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से हम बार बार प्रार्थना करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं💐💐।
