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September 15, 2026
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डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दिए सर्वे कर ड्रॉपआउट बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश

बेटियां पढ़े, आगे बढ़ेः-स्नातक तक बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करने को जिला प्रशासन की बडी पहल

नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट से ड्रॉपआउट बालिकाओं को मिलेगी शिक्षा की राह

जनपद में बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करने और स्कूल छोड़ चुकी छात्राओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित ‘नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट’ की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को ठोस एवं परिणामोन्मुखी कार्ययोजना पर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बालिका की शिक्षा आर्थिक, सामाजिक अथवा पारिवारिक कारणों से बाधित नहीं होनी चाहिए और प्रशासन का प्रयास होगा कि प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया जाए।

शुक्रवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में ड्रॉपआउट बालिकाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी को व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक ऐसी सभी बालिकाओं की पहचान की जाए, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है। इन बालिकाओं को पुनः विद्यालयों से जोड़कर उनकी शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल बालिकाओं का विद्यालय में पुनः नामांकन कराना नहीं, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनपद की प्रत्येक ड्रॉपआउट बालिका को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए कम से कम स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त कराने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक परिस्थितियों अथवा अन्य विषम कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए विशेष सहायता तंत्र विकसित किया जाए। जरूरतमंद छात्राओं को शासकीय योजनाओं, छात्रवृत्तियों तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों से लाभान्वित कर उनकी शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए।बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को इस अभियान का नोडल अधिकारी नामित करते हुए कहा कि ड्रॉपआउट बालिकाओं की पहचान, पुनः नामांकन, शैक्षिक प्रगति तथा स्नातक स्तर तक उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाई जाए। उन्होंने विभागीय समन्वय के साथ नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति समीक्षा पर भी जोर दिया।जिलाधिकारी ने कहा कि बालिका शिक्षा केवल सामाजिक विकास का आधार नहीं, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट के माध्यम से जनपद की प्रत्येक बालिका को शिक्षा का अधिकार और बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है।बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।।

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